अब ठाकरे खोदेंगे उत्तर भारतीयों की कब्र!

हमें इस बात से नहीं मतलब कि उन्होंने उत्तर भारतीयों के कांग्रेसी नेताओं को उन्होंने सांप कहा कि नाग (जैसा कि 'सामना' में कृपाशंकर सिंह को सांप और संजय निरुपम को नाग कहा है) मतलब इस बात से है कि लोकतंत्र में जनाधार के पैमाने पर औकात पता चलने के बाद भी बाज नहीं आ रहे बाल ठाकरे। ठाकरे की मराठी राजनीति को महाराष्ट्र की जनता का समर्थन नहीं करती, ये बात साफ हो चुका है फिर भी बाल ठाकरे का बयान सुनिए- ''उत्तर भारतीय नेता कह रहे हैं हमे मुंबई में आने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए मराठियों ने औरंगजेब की कब्र खोदी थी, ज्यादा बोलेंगे तो मराठी उनकी भी कब्र खोद देंगे।
इस बयान में कुछ नया नहीं है, ऐसे ही बयानों पर सिंकती रही है ठाकरे परिवार की रोटी, पलता है ठाकरे परिवार का पेट, हार के बाद मराठी लोगों को नए तर्क के साथ जगाने में जुट गए हैं बाल ठाकरे, जब जय महाराष्ट्र के नारे से काम नहीं चला तो इसमें दिल्ली, पंजाब और राजस्थान जैसे पश्चिमी राज्यों को भी जोड़ लिया."दिल्ली वाले हमेशा डरते रहे हैं कि मराठी एक दिन शासक बनेंगे। महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान को छोड़ कर किसी भी राज्य ने योद्धा पैदा नहीं किया। पूरे उत्तर भारत में या तो गुलाम पैदा हुए या फिर मुगलों और अग्रेजों के चमचे. मराठी लोग 500 साल से लड़ रहे हैं, लड़ना इनके खून में है, हमेशा से मराठियों की शान तलवार रही है, और जब तक ये तलवार मजबूत है तब तक मराठियों की तरफ कोई आंख उठा कर नहीं देख सकता"
देखिए कैसे ललकार रहे हैं ठाकरे। अब बताइए भला, कौन आंख उठाकर देख रहा है मराठियों की तरफ? कौन उन्हें दोयम दर्जे का बता रहा है, यही कह रहा है न जैसे देश के बाकी शहर, वैसे बाकी देश के लिए मुंबई। यही बात तो मराठी जनता भी कह रही है, अगर नहीं कहती तो ठाकरे की पार्टिय(यों) के आगे महाराष्ट्र में कोई नहीं टिकता. लेकिन ठाकरे की ढीठई देखिए-''शिवसेना के बाजुओं में अब भी इतनी ताकत है कि उन लोगों के हाथ काट दे, जो मुबंई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहते हैं। "
चलिए, किसी और को नहीं, तो कम से कम मराठी लोग समझ गए हैं ठाकरे परिवार को मालदार मुंबई से इतना प्यार क्यों है.
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