रविवार, जुलाई 27, 2008

अब तो संभलिए जनाब...

एंकर छोटा...रिपोर्टर छोटा, कमेंटेटर छोटा, प्रेजेंटर छोटा और तो और स्टूडियो का मेहमान भी हो गया है छोटा...

इन सबसे बड़ा हो गया है- विजुअल का विंडो। यही तो आतंकियों की साजिश थी- जितना बड़ा धमाका, उतना बड़ा विंडो, देखिए, किस तरह कामयाब हुए हैं आतंकियों के मंसूबे...

माफ कीजिएगा, एक दर्शक का दर्द बयां कर रहा हूं। हमारे अपने ही चैनल हमको कितना बड़ा चूतिया समझते हैं. समंदर पार बाल भी उखड़ता है तो दिन रात लाइव ताने रहते हैं. यहां एक के बाद एक शहर धधक रहे हैं, समंदर पार वाले चैनलों को सिर्फ अपनी पड़ी है.

जब बैंगलुरू में बम फटे तब भी, जब अहमदाबाद की आह से पूरा देश दहल गया तब भी. सीएनएन वाले, बीबीसी वाले तब या तो अपनी मौज में थे, या बस दिखाने की खानापूर्ति कर रहे थे.
हम वाकई चूतिये हैं। समंदर पार वालों से दोस्ती के लिए अपने संबंध खट्टे कर रहे हैं. कोई सरकार गिराने के लिए तो कोई सरकार बचाने के लिए मां बहन एक कराने को तैयार है

अब तो संभलिए जनाब

5 टिप्‍पणियां:

प्रभाकर पाण्डेय ने कहा…

कोई सरकार गिराने के लिए तो कोई सरकार बचाने के लिए मां बहन एक कराने को तैयार है
...बिलकुल यथार्थ और सदासत्य।

Anil Pusadkar ने कहा…

nangaa kar diya aapne bina riharsal ke pardesh ke chamche,deshi chhanel waalon ko.dhamako se jitni goonj nahi hoti us se kai guna jyaada ye bata dete hain .badhai aapko bebak post ki

Suresh Chiplunkar ने कहा…

पुसदकर जी से एकदम सहमत, इन चैनल वालों को दस जूते लगाकर एक गिनना चाहि्ये… और सौ तक गिनना चाहिये…

परमजीत बाली ने कहा…

bilkul saty kahaa aapane.sahamat.

पशुपति ने कहा…

इतना गुस्सा... बाबा रे बाबा... थोड़ा कम कीजिए गुस्सा... अगली बार बाप-भाई एक करा दीजिएगा... तब भी ये चैनल वाले अपनी आदत से बाज नहीं आएंगे... क्यों?