गुरुवार, फ़रवरी 14, 2008

निर्लज्ज नायक!




देखने वालों के जिगर में जाने कब तक ये तस्वीर...राज ठाकरे की ये विजयी मुद्रा...जिस पर आरोप हो लोगों की भावनाएं भड़काने का... जिसके घर पुलिस गई हो गिरफ्तारी करने...उसके चेहरे पर भला ऐसी मुस्कान होती है...कौन नहीं कहेगा, राज ठाकरे अगर कानूनी तौर पर अपराधी हैं...तो ये एक अपराधी के चेहरे पर पसरी निर्लज्ज मुस्कान है...


और वो अपराधी मुस्कराए नहीं तो क्या करें, जिसकी गिरफ्तारी के लिए खुद को स्कॉटलैड यार्ट के मुकाबिल कहने वाली मुंबई पुलिस तीन दिन से प्लानिंग करें...दो कदम आगे बढ़े तो चार कदम पीछे हटे...गिरफ्तारी से पहले सौ बार अंजाम के बारे में सोचे- वो गुनहगार मुस्कराए नहीं तो क्या करें...

ऐसी शानदार गिरफ्तारी पर तोड़-फोड़ और मारपीट करने वाले समर्थक हो-हंगामा तक न करें ऐसा कैसे हो सकता है...शिवाजी पार्क के चप्पे चप्पे पर पुलिस रही...लेकिन किसी की कोई मजाल कि राज ठाकरे के समर्थकों को चुप करा दे...वो खुलेआम पुलिस के सामने राज के अपराधों का खुला समर्थन कर रहे थे- और पुलिस खुलेआम राज ठाकरे को मौका दे रही थी- बड़ी शान से अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील करने का...उनकी नजर में मराठा हीरो बनने का...


कोई है जो मुंबई पुलिस से पूछ सके कि- अगर ऐसी ही नारेबाजी कोई दाउद इब्राहिम या अबु सलेम के समर्थन में करे, तो वो क्या करेगी...आखिर राज का भी अपराध तो कम नहीं...जो शख्स जान बूझ कर देश की आंतरिक शांति को तलवार की धार पर खड़ा कर दें...विविधता में भी भाईचारा का भाव रखने वाले देश में सूबे की लकीर खींच दें...लेकिन नहीं, मुंबई पुलिस बस चुप-चाप देखती रही...बिछी रही राज ठाकरे की सुरक्षा में...गिरफ्तारी से लेकर कोर्ट में पेशी तक....


कोई कैसे नहीं समझे, कि ये गिरप्तारी और कोर्ट में पेशी सिर्फ एक दिखावा है...जिसे मिलती है 14 दिनों की न्यायिक हिरासत...उसे मिल जाती है दस मिनट में जमानत...वो भी उस हालात में जब गुनहगार के फरमाबदार मुंबई ही नहीं पूरे महाराष्ट्र में उधम मचाए हुए हैं...और सबसे बड़ी बात राज को इस बात का मलाल तक नहीं...तो क्या राज ठाकरे के साथ सरकार भी ये मानती है कि महाराष्ट्र में सूबावाद के नाम पर जो हो रहा है...वो ठीक है...अगर ऐसा है तो इतनी नौटंकी की क्या जरूरत थी...

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