शुक्रवार, नवंबर 05, 2010

संभालना अपने अपने दीये



माथे पर सजाकर
रौशनी की टोकरी
फिर से आया है दीया
अंधेरे से दो-दो हाथ करने
अपने दिल में जलाए
उम्मीदों का उजाला
हुंकार भरेगा अंधेरा
हाहाकार मचाएगा
दीये को डराएगा
बुझ जाने का डर दिखाएगा
देखिगा
कहीं कम न पड़ जाए
दीये का हौसला
गिर न जाए उसके माथे से
रौशनी की टोकरी
सुबह सूरज आएगा
तो सब संभाल लेगा

5 टिप्‍पणियां:

राजकुमार ग्वालानी ने कहा…

हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई
जब सब हैं हम भाई-भाई
तो फिर काहे करते हैं लड़ाई
दीवाली है सबके लिए खुशिया लाई
आओ सब मिलकर खाए मिठाई
और भेद-भाव की मिटाए खाई

वन्दना ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति।
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।

संगीता पुरी ने कहा…

दीपावली का ये पावन त्‍यौहार,
जीवन में लाए खुशियां अपार।
लक्ष्‍मी जी विराजें आपके द्वार,
शुभकामनाएं हमारी करें स्‍वीकार।।

Udan Tashtari ने कहा…

सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

-समीर लाल 'समीर'

एस.एम.मासूम ने कहा…

दीयों के इस पर्व दीपावली की आप को हार्दिक शुभकामनाएं
ये दीप पर्व आपके और आपके परिजनों के जीवन को खुशियों के प्रकाश से भर कर दे