सोमवार, मई 24, 2010

तपिश में बारिशों के अरमान

इतनी शिद्दत भरी है तपिश कि कहीं चैन नहीं. सूरज चाचू इतने तपे तपे हैं, कि सुलगते अरमान दहकने से लगे हैं. कई बार तपिश तो सिर्फ एक बहाना लगती है. पसीने के पीछे परेशानी कोई और लगती है. बार बार नजर जाती है मटमैले आसमान से, बड़ा बीमार सा लगता है आसमान. ऊपर से 'ऊपरवाले' का, नीचे से 'नीचेवालों' का उत्सर्जित ताप झेलते हुए.

एक दोस्त ने पूछ दिया (फेसबुक पर) पहले तो दादा-परदादा बारिशों के टोटके करते थे. 'ऊपरवाले' का ध्यान खीचने के लिए कीचड़ में मेंढकों के जोड़ों को निकाल कर शादी कराते थे (ताकि वो बेदिल बच्चों की तरस का तो ख्याल करेगा)आज के दौर में कौन से टोटका करे...

अब इस सवाल के जवाब में तपते, सुलगते तमाम अरमान छलक पड़े, गनीमत है, कंप्यूटर पर बैठा था, अंजुरी में समेट कर उस दोस्त के साथ आपको भी परोस रहा हूं. गले से नहीं उतरे तो कहिएगा, जी न चुराइएगा...


बारिश के लिय़े टोटके के
रूप में मेरी सलाह तो यही है कि-

एक बार 'उनकी' जुल्फों को उड़ाकर देखिए
तपती हथेलियों पर बूंदों की रिमझिम तय है

फसाना लगे तो माफ कीजिएगा.
दिल बहलाने के अफसाने ऐसे ही हसीन होते हैं

जाने क्यों ख्वाब में सजे
कांटे भी फूलों से गुलजार लगते हैं

अफसानों में आपने कालीदास के
मेघों को महबूब मैसेज पहुंचाते देख रखा है

तो उनके जुल्फों के कहने पर
ऊपर वाला इतना भी नहीं पिघलेगा?

आसार तो ऐसे कतई नहीं दिखते
आप उनकी जुल्फों से जरा खिलवाड़ करके तो देखिए

लबों पे अपने एक बार
सजा तो लीजिए बारिशों के अरमान

इतनी भी संगदिल नहीं उनकी जुल्फें

* बारिश के लिए टोटके के रूप में तो मेरी सलाह जरा रोमांटिक है-