शनिवार, फ़रवरी 27, 2010

कान पकड़िए, 'बाबा' के भक्त नहीं बनेंगे



मुंह में राम
बगल में बाला

साधु के चोले
में देह का दलाल
 
साधना साईं की
संपर्क सोनू पंजाबण से
 
साधना की आड़ में
जिस्म का सौदागर
 
आश्रम को बनाया
अय्याशी का अड्डा
 
ये है दिल्ली के
सेक्स रैकेट का स्वामी


दिल्ली के खानपुर के हैं बाबा. साईं बाबा के नाम पर मंदिर और आश्रम खोल रखा था. बाबा साधना तो करते थे साईं की, लेकिन संपर्क थे सोनू पंजाबण से (इंटर स्टेट सेक्स रैकेट की सरदार) ताना बाना बुन रखा था 500 लड़कियों के नेटवर्क का, जिन्हे बनारस से बॉम्बे, बैंगलुरू से कोलकाता तक के हाई सोसाइटी में सप्लाई करता था बाबा...

ये तो बाबा के कर्म है, अब पढ़िए बाबा की एबीसी. बाबा चित्रकूट से हैं, तुलसीदास की नगरी से. 1995 में दिल्ली आए थे काम करने, शुरु किया एक फाइव स्टार में सिक्योरिटी कार्ड की नौकरी से, लेकिन जल्दी ही असली 'काम' शुरु कर दिया. लाजपत नगर के एक पार्लर में लग गए लेकिन 1997 में छापा पड़ा तो पकड़े गए, जिस्मफरोशी कराने के आरोप में कई महीने जेल रहे. जेल में दाढ़ी बाल बढ़ गए, लुक साधु वाला हो गया, तो फिर इसे ही बेचना शुरु कर दिया. बन गए साईं बाबा के भक्त और शुरु कर दिए प्रवचन. कुछ ही साल में मंदिर और आश्रम बनवा लिए.

अब देखिए बाबा की पैठ. नॉर्थ एवेन्यू तक पहुंच गए थे बाबा के तार. 2008 में रुतबा इतना हो गया था कि सांसदों की नगरी में साईं भजन संध्या करवा दिये जहां बीजेपी नेता वी के मलहोत्रा से लेकर कीर्ति आजाद सरीखी हस्तियां शामिल हुईं. चित्रकूट के में हुए कार्यक्रम में यूपी के कई मंत्री और सांसद शामिल हुए. बाबा के धरे जाने के बाद अब सब कह रहे हैं, उन्हें बाबा के करतूतों का पता नहीं था. उनके साथ सैकड़ों लोगों को बाबा ने धोखा दिया, उनकी साईं श्रद्धा का फायदा उठाया. लेकिन जब बाबा का मुंह खुलेगा, तो कितने चेहरे लाल होंगे ये कहना अभी मुश्किल है

सवाल है कि आप बाबाओं के फेर में पड़ते क्यों हैं, अगर आप साईं के भक्त हैं, राम के भक्त हैं, और किसी फ्लाने-चिलाने के भक्त हैं तो आपको बाबाओं का जरिया क्यों चाहिए? आप नहीं जानते आपकी श्रद्दा की वजह से इन बाबाओं की ठेकेदारी कितनी बड़ी हो जाती है, कान पकड़िए, किसी बाबा के भक्त नहीं बनेंगे आप...

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

कान पकड़ते हैं...राम भजो!!

कुमार विनोद ने कहा…

समीर जी, अपना तो कान हमने भी पकड़ लिया, आपने भी पकड़ लिया, मन तो औरों के कान भी पकड़ने का करता है, जैसे हमारे जमाने में होता था किसी का बच्चा गलती करे, कान कोई भी पकड़ लेता था, कोई कुछ नहीं कहता था, लेकिन आज डर लगता है...