गुरुवार, दिसंबर 31, 2009

न्यू इयर का पॉजिटिव विश!



31 दिसंबर
साल के कैलेंडर की इस आखिरी तारीख का एहसास गजब का होता. वक्त के सिलसिले का ऐसा मोड़ जहां खोने और पाने का एहसास एक साथ होता है. लेकिन...इस बार वक्त की परतों में गुम होने वाला है एक पूरा दशक...

मेरा माजी मुझसे बिछड़कर
ना जाने किस हाल में हो
ऐसा भी हो सकता है
मेरी तरह वो भी तनहा हो


उम्र का एक और साल माजी बनने के कगार पर है. नए साल की आहट एक और साल को तन्हा करने वाली है. लेकिन ये तो दुनिया है, राजी-खुशी, या शिकवा शिकायतों के बावजूद साल दर साल यही सिलसिला चलता है...

न पाने से किसी के है
न कुछ खोने से मतलब है
ये दुनिया है इसे तो
कुछ न कुछ होने से मतलब है


साल के इस मोड़ पर जाने क्यों ऐसा लगता है, बंदा पीछे मुड़कर देखता है- जो हुआ, वो न होता तो क्या होता, जो नहीं हुआ, वो हुआ होता तो क्या होता...

तुम नजर से नजर मिलाते तो
बात करते न, मुस्कराते तो
चांदनी रात सिसकियां भरतीं
तुम जरा अपनी छत पर आते तो
दोस्ती में अना नहीं होती
खुद न आते, कभी बुलाते तो
आ भी जाओ, कि हम बुलाते हैं
तुम बुलाते, जो हम न आते तो


इसी पसोपेश है दिल, हमारा, आपका सबका दिल, गुजारिश है भूल जाइए कड़वी यादें...जिससे जलता है दिल. सजा लीजिए आंखों में कुछ नए सपने, बात किताबी है, लेकिन ऐसी हसरतों से बहलता है दिल.

आप सबको साल 2010 मुबारक!

गुरुवार, दिसंबर 24, 2009

न हंसे होते, न फंसे होते...



हंसी तो फंसी...
इसे मनचलों का मुहावरा कहिए या फेवरेट फार्मूला, जुमला लागू हो रहा है 'छेड़खानीपसंद' पूर्व डीजीपी एस एस राठौर पर पर. साहब की '4 इंच की मुस्कान' बन गई गले की फांस...

राठौर के चेहरे पर बेपरवाह और बेशर्म सी मुस्कान देखकर ही लगता है, 1990 में 14 साल की टेनिस खिलाड़ी रुचिका गिरहौत को छेड़ने के बाद पिछले 19 सालों में(माफी-लाइन में डीजीपी का डेटा कुछ ज्यादा हो गया) ऐसे ही हंसते रहे होंगे डीजीपी...

जब जब डाला होगा केस की सुनवाई में अडंगा-
केस को अंबाला से पटियाला,पटियाला से चंडीगढ़ ट्रांसफर करने की मांग,तो सुनवाई की वीडियो रिकार्डिंग करने की दलील.
जब जब लटकाई होगी सीबीआई की जांच
जब जब दबाई होगी 'कार्रवाई' की फाइल,
हर कामयाबी पर इसी तरह फूटी होगी ये बेशर्म मुस्कान.


लेकिन, 19 साल बाद जब सीबीआई कोर्ट ने 'लंबी सुनवाई और आरोपी की ज्यादा उम्र' की दलील देते हुए 6 महीने की सजा सुनाई तो हद ही हो गई
विजयी ठहाके के साथ 2 से 4 इंच की हो गई राठौर की मुस्कान, वो भी कैमरे पर...

आज की पीढी तो पूरा मामला भी भूल चुकी थी, लेकिन एक मुस्कान पूरी कहानी बता गई-

जाते जाते जो मुड़ के देख लिया
और उलझा दिया खयालों को
एक हल्की सी मुस्कराहट से
उसने हल कर दिया सवालों को


इस सिचुएशन पर बड़ा ही दिलदार शेर दे मारा 'केएसएच' (क्या सीन है) के कॉलमनिस्ट बैताल बेअदब ने. मोबाइल पर मैसेज मिला, तो मैं समझ नहीं पाया, आखिर मिलने पर शेर का मजमून बड़े विस्तार से समझाया-

मियां को एक मुस्कुराहट मार गई, जो मीडिया, जो महिला आयोग पिछले 19 साल से चुप थे, अचानक एक मुस्कराहट से जाग गए. मीडिया ने मुस्कान को हाईलाइट किया, तो महिला आयोग भी जाग गई. पूरे दशक में कभी कोई ऐसा मौका याद नहीं आता, जब मामले में महिला आयोग ने कोई आवाज उठाई हो. आज दोबारा जांच की मांग कर रही है महिला आयोग, लेकिन सीबीआई की आधी अधूरी जांच पर 19 साल तक चुप क्यों रही?

इस बार भी बच जाते डीजीपी, लेकिन, आयोग की तर्ज पर अपनी नींद सोई मीडिया को 'खेलने' का शानदार विजुअल मिल गया- भई, ये तो गजब है, गनुहगार ठहराए जाने पर कोई ऐसे कैसे हंस सकता है. राठौर की इस ऐतिहासिक हंसी ने सजा का सवाल भी खड़ा कर दिया-

अब सीबीआई को भी लग रहा है सजा कम हुई है(आने वाले दिनों में शायद अपील हो) हरियाणा के पूर्व गृह सचिव को भी लग रहा है- केस को दबाने में रसूख का इस्तेमाल हुआ. वर्ना, हरियाणा पुलिस महकमे ने तो राठौर के खिलाफ 1990 में ही कार्रवाई की सिफारिश कर दी थी

बताइए भला, एक मुस्कान ने क्या से क्या कर दिया, बैताल बेअदब ने ठीक ही कहा था- न हंसे होते न फंसे होते राठौर