बुधवार, अगस्त 12, 2009

स्वाइन फ्लू का पॉजिटिव पैकेज

टीवी खबरों की रौ में ज्यादा मत बहिए, 21 या 29 इंच के फ्रेम में इलाज के मारामारी देखकर घबराइए नहीं, हिम्मत रखिए, यहां तो शॉट्स ही वही सेलेक्ट किये जाते हैं, जिनमें मारामारी हो, अफरातफरी हो, बाइट भी डराने वाली हो, लेकिन आप ये देखकर डरिए नहीं, स्वाइन फ्लू के कुछ ऐसे सच हैं, जो दिल से डर निकालने के लिए जानना जरूरी है।
जी हां,
वाइरस से खतरनाक है खौफ
स्वाइन फ्लू से डरिए नहीं
वाइरस का मुकाबला कीजिए.
स्वाइन फ्लू से डरना मना है


जितना डरेंगे, आपके ऊपर उतना ही हावी होगा स्वाइन फ्लू का वायरस. ये माना कि छुआछूत से फैलने की वजह से पूरी दुनिया में इसे महामारी का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन ये कोई डरने की वजह नहीं
सबसे पहले गौर कीजिए इसके लक्षण पर, आखिर स्वाइन फ्लू के लक्षणों में ऐसा कुछ नहीं, जो आम फ्लू से ज्यादा खतरनाक हो. आम वाइरल इन्फेक्शन में भी सर्दी जुकाम के साथ हल्का बुखार, नाक बहने और गले में खराश की शिकायत होती है, यही स्वाइन फ्लू में भी होता है, ज्यादा गंभीर होने पर उल्टी की शिकायत होती है,लेकिन इतने भर से जानलेवा कैसे हो सकती है बीमारी. हां, आपके अंदर का खौफ वायरस को ताकतवर जरूर बना सकता है

अगर ताकत के लिहाज से भी देंखें, तो पहले से मौजूद वायरस की तुलना में H1N1 वायरस बेहद कमजोर है अगर दूसरे वायरल इन्फेक्शन 4 से पांच दिन में ठीक होते हैं, स्वाइन फ्लू का इलाज ज्यादा से ज्यादा 7 दिन में पूरा हो जाता है. इससे ज्यादा खतरनाक तो मलेरिया और टायफायड जैसी बीमारियों के वायरस हैं, जिनकी चपेट में आने के बाद महीने दो महीने तक नहीं उतरता बुखार. अगर मलेरिया, टायफायड से लड़ सकते हैं तो स्वाइन फ्लू से क्यों नहीं।

साफ है, स्वाइन फ्लू की चपेट में आने के बाद आपको सिर्फ 7 दिन तक इसके वायरस से मुकाबला करना है. एक बार बुखार उतर जाए, तो पूरी तरह रिकवरी हो जाती है स्वाइन फ्लू में। न कोई दाग रहता है, न बीमारी का कोई और निशान. कुछ दिन तक कमजोरी जरूर रहती है, लेकिन खान पान सुधरने और कुछ दिन के आराम के बाद ये धीरे धीरे नॉर्मल हो जाती है. अव्वल तो ये, एक बार इलाज पूरा होने के बाद आपका शरीर H1N1 से लड़ने में पूरी तरह सक्षम हो जाता है

अगर अब भी स्वाइन फ्लू से आपका डर नहीं गया, आप अब भी ये समझते हैं कि स्वाइन फ्लू की चपेट में आने का मतलब मौत को गले लगाना है, तो जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए पुरी दुनिया में स्वाइन फ्लू के 2 लाख मरीज बताए जाते हैं, इनमें अब तक 1900 की मौत हुई है. आप खुद कैलकुलेट कीजिए, स्वाइन फ्लू में मृत्युदर 1 फीसदी से भी कम है. जबकी टीबी में 3.5 फीसदी, और चेस्ट इन्फेक्शन की दूसरी बीमारियों में मृत्यु दर 11 फीसदी तक है.

क्या अब भी आपके पास स्वाइन फ्लू से डरने की वजह है? दुनिया भर में जो भी मौते हुई हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बुनियादी स्तर पर लापरवाही वजह की वजह से हुई है. एहतियात के साथ वक्त पर जांच, और जांच के मुताबिक पूरा इलाज, यही है स्वाइन फ्लू से बचने का उम्दा उपाय. आप तमाम खतरनाक बीमारियों का सामना पहले ही कर चुके हैं, फिर स्वाइन फ्लू से क्या डरना.

3 टिप्‍पणियां:

विजय वडनेरे ने कहा…

एल्लो...
अपन तो बेफ़ाल्तुइच्च डर रये थे।

लो भीया, अपनने तो मास्क-फ़ास्क उतार फ़ेका और स्वाइन फ़्लू से के रये हें कि -ले आ आ..आके दिखा!

अर्शिया अली ने कहा…

Saarthak praayaas hai aapka.
{ Treasurer-S, T }

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

जिजिविषा सब से बड़ी दवा है।