मंगलवार, सितंबर 09, 2008

क्या विनोद जी, मरवा के ही दम लेंगे!

स्केच-जेनेवा का 'काला छेद'

'अरे सुनिए सुनिए, दफ्तर तो रोज जाना होता है, कभी हमसे भी दो चार हो लीजिए, आप लोग तो मरवा के ही दम लीजिएगा. काल को तो महाकाल बना ही दिए हैं आप, अब तो लगता है न हम बचेंगे, न कपाल. माजरा क्या है भैये, डेलिंग-पेलिंग के काम में मराते मराते तो वैसे भी थक चुके हैं, क्या वाकई मरने की बारी आ गई है, सच सच बताईएगा...ये देखो, डर के मारे पसीने तक नही छूट रहे...कहीं 'काले छेद' ने 24 घंटे पहले ही तो सोखना शुरू नहीं कर दिया ?'

माफ कीजिएगा, सोसाइटी का प्रॉपर्टी डीलर है, जब भी सामने पड़ जाता है, दुनिया जहान के मसलों पर ऐसे ही बात करता है, आप उसे चुंकि पहली बार सुन रहे हैं, इसलिए भद्दा लग रहा होगा, वर्ना उसे सुनकर तो यही लगता है- उसे हर 'चुतियापे' का पूरा पता है. और एक बार जो वो शुरू हो जाए तो आप उसे चलता नहीं कर सकते हैं, आपके गले में हाथ डालकर वो सब पूछ लेता है. मैंने भी सोचा, शर्ट क्या गंदा करवाना है, चलिय़े झेल ही लेते हैं...

''विनोद जी, वैसे तो साइंस हमने भी कम नहीं पढ़ा, बस एमएससी का फाइनल एक्जाम नहीं दिया, वर्ना हम भी कम विज्ञानबाज नहीं होते थे, लेकिन विज्ञान से ऐसा पाला कभी नहीं पड़ा. टीवी देखदेख कर अक्ल खराब हो गई है, सबसे पहले तो यही नहीं समझ में आता कि ये महामशीन जब 14 साल से बन रही थी, तो इस पर अभी क्यों हाय तौबा मचा. अगर प्रलय की तैयारी इतने दिनों से हो रही थी, तब...अच्छा...अच्छा, तब तो खैर 'आप लोगों' का जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन ये भी क्या खूब है, जनाब, पैदा होते ही आपलोग इतने बड़े हो गए कि नोबेल प्राइज विनर साइंटिस्ट्स को भी डंडा करने लगे.'

मेरे पास खींसे निपोरने के सिवा और कोई चारा बचता था क्या, आप ही बताइए...मैंने फिर भी ढीठई की- लेकिन उससे पहले ही एक सवाल और...
'विनोद जी आपको पता है, हमारे आसमान में कितने ब्लैक होल हैं, और कितने बड़े हैं, और हमारी धरती से सबसे नजदीकी ब्लैक होल कितनी दूर है? कल ही कही नेट पर सर्च मारा था, तो पाया कि 2600 प्रकाश वर्ष दूर है पृथ्वी के सबसे नजदीक वाला काला छेद, और साइज? साइज है सूर्य से हजार गुना बड़ा. और ये करोड़ो वर्षों से हैं, अगर आप लोगों की कसौटी पर ही कसें, तो इस धरती को कब का उस ब्लैक होल में समा जाना चाहिए था, लेकिन ये तो आज भी डोल रही है...'

'.... .... ...'
'आप लोग तो चार इंच के ब्लैक होल में पूरी दुनिया के समाने की बातें कर रहे हो. क्या आपने नहीं पढ़ा है- सूरज की उमर 5 करोड़ साल है, इसके बाद जब इसका ईंधन खत्म हो जाएगा, इसका आकार बढ़ेगा और ये बुझना शुरू होगा, लेकिन ब्लैक होल बनने की औकात इसमें भी नहीं, ये ज्यादा से ज्यादा सुपरनोवा बन सकता है, तो फिर 27 मील वाले इस लार्ज हेड्रोन कोलाइडर की क्या औकात? मान लीजिए, 10-10 फीट के एक हजार ब्लैक होल बन ही गए, और आपस में मिलकर बड़े भी हो गए, तो वो कितने बड़े हो जाएंगे कि दो सेकेंड में धरती, दो मिनट में चांद और 8 मिनट में सूर्य को निगल लेगा'

मैंने कहा- ऐसा होना तो नहीं चाहिए...

'तो फिर काहे गला फाड़ कर चिल्ला रहे हैं आप लोग, वैज्ञानिक बच्चे हैं क्या, अरे ठीक है, पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं, एक प्रोजेक्ट पर इतन खर्च कर रहे हैं, कि उसमें पूरी दुनिया की गरीबी मिट जाए, हर देश का इंफ्रास्ट्रक्चर दुरूस्त हो जाए, अव्वल तो ये, कि आप लोगों के खबर का एंगिल ये होना चाहिए. अच्छा मौका था, जब बहस शुरू होती, कि आखिर क्यों हम जाने धरती की पैदाइश का रहस्य, जब ग्लोबल वार्मिंग और दूसरी वजहों से इसका भविष्य ही खतरे में हैं. लेकिन आप लोगों ने फायदे तो एक नहीं बताए, लगे खिंचाई करने. अब समझ में आ रहा है- जब कॉपरनिकस ने कहा होगा- कि सूरज हमारी धरती की नहीं, हमारी धरती सूरज की परिक्रमा करती है, तब लोगों ने कैसा शो-ओपेन बनाया होगा, जब न्यूटन ने चीजों के ऊपर से नीचे गिरने का रहस्य बताया होगा, हमारे वजन का राज खोला होगा, तो मठाधीशों ने कैसा उत्पात मचाया होगा, बुरा मत मानियेगा- आप लोग कुछ वही कर रहे हो.

'वैसे, हम आपको बता दें, कि आज के लोग उतने चूतिये नहीं, जितने आप समझ रहे हैं, बड़ों की छोड़िए, बच्चे भी हंस रहे हैं...पता है आज ही की बात है, बेटे की डायरी जब चेक की, तो उसमें 11 को स्कूल में पेंटिग कंपटीशन का जिक्र था. मैने कहा- बेटा कलर और ड्राइंग पेपर चाहिए तो बोल दो, अच्छे से तैयारी करना...बेटा हंसने लगा. मुझे समझ में नहीं आया, फिर वो खुलखुलाते हुए बोला, छोड़ो पापा, 11 को हम बचेंगे ही नहीं, तो पेंटिंग कौन बनाएगा.'

हंसने को तो मैं भी उसके साथ जबरदस्ती हंस रहा था, लेकिन दरअसल में उससे पीछा छुड़ा रहा था. मैं अपनी भद्द और पिटवाना नहीं चाह रहा था. शुक्र है उसने भी पड़ोसी होने का फर्ज निभाया, मुझे बख्श दिया. लेकिन मुझे पता है, उसके सवाल अभी पूरे नहीं हुए, वो मुझे कभी भी दबोच सकता है.

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