शुक्रवार, दिसंबर 21, 2007

KISS KISS KA YEAR 2007

वो और दिन थे जब हिंदी सिनेमा के पर्दे पर...हीरो हीरोइन के बीच इंटीमेट सीन मद्धम रौशनी या ढलते हुए सूरज या फिर चोंच लड़ाते पक्षी...जैसे संकेतों में बयां किया जाता था. लेकिन gone are the days, आज बॉलीवुड का मॉडर्न सिनेमा ऐसे संकेतों को दकियानूसी कहता है...अब सीन को चाहिए... रीयल... बिलकुल असली मादकता से भरपूर संकेत...और सीन की डिमांड साल 2007 में कैसे कैसे सीन्स के जरिए पूरी हुई...आपको नहीं लगता कि यही वो मुनासिब वक्त है जिसमें हम विचार करें...भैये, पहला विचार तो इन सीन्स की रूप रेखा पर ही आता है कि बाप रे, देखते देखते ही इतने रीयल हो गए कि सेंसर बोर्ड का माथा-जो कई फैसलों में दिखता नहीं-तक चकरा गया- मुंबईया फिल्मकारों ने ऐसे सीन्स को कहानी के ताने बाने में घुसेड़ने की ऐसी कला सीख ली है कि काटो तो कहानी की रौ बिगड़ती है...छोड़ दो पब्लिक भड़कती है...ये इंडिया का सीन है गुरू...पब्लिक देखती भी है...और भड़कती है...(अब आप ही बताईए, बिना देखे कोई कैसे भड़केगा!)

जरा याद कीजिए पिछले साल नवंबर में सेंसर बोर्ड से पास हो कर आई धूम-2 के इस सीन को...जिसने पब्लिक तो पब्लिक, बच्चन परिवार तक को इतना आहत किया...(इतना आहत किया...कि वो चोपड़ाज से ही भिड़ गए. अंदरखाने की मानें, तो कई महीने तक बोलचाल बंद थी...बच्चन परिवार की मांग थी कि व्यावसायिक नुकसान चाहे जितना भी हो, सीन को निकाल दिया जाए...लेकिन बनिए को माल के सिवा और कुछ कहां सूझता है...वो सीन निकालने पर राजी तो हुए...लेकिन किस के निशान छोड़ गए...) खैर, बच्चन परिवार उस किसिंग सीन के सीरियस पोर्शन्स आनन फानन में हटावाने में कामयाब रहा. लेकिन पब्लिक तो धूम-2 देखने अभी भी दौड़ रही थी- क्या सीन है बंधू-शादी अभिषेक से, और किस रितिक को, कहीं मामला खंटाई में तो नहीं पड़ गया. लोगों ने फिल्म इतनी देखी...कि सुपरहिट ही हो गई.(अगर आप याद करें तो चोपड़ाज ने कुछ ऐसा ही खेल 'सिलसिला' के ज़माने में खेला था- अमिताभ-रेखा की प्रेम कहानी को जया जी की जिंदगी में घुसा कर...क्या रीयल सिचुएशन बनाया था प्रेम त्रिकोण का...कहने की बात नहीं कि वो फिल्म भी हिट हुई) खैर, हम बात कर रहे थे हृतिक-ऐश के डेब्यू लिप-लॉक पर किचकिच की...जो साल 2006 में ही शुरू हो गई थी...सीन लोगों को पंसद तो आ रहा था...लेकिन रास आने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी...(इंडियन्स की जेनविन प्रॉबलम) जो 2007 तक जारी रही. यहां तक कि ऐश को शादी के बाद कोर्ट का एक और नोटिस मिला- बिहार के एक वकील ने हृतिक, ऐश, आदित्य चोपड़ा और को मुद्दई बनाते हुए आरोप लगाया कि ऐसे सीन्स महिलाओं के लिए अपमानजनक है. और कोर्ट ने भी पूरी गंभीरता बरतते हुए इन तीनों के साथ बिहार सरकार को नोटिस थमा दिया कि सीन देखे बिना आप लोग सिनेमाघरों में फिल्म कैसे पहुंचा देते हो. खैर, मामला किसी तरह ढंडा पड़ा.

ऐसे में जब सीरियल किसर इमरान हाशमी ने ऑन कैमरा ऐलान किया कि अब वो फिल्मों में किस करना छोड़ देंगे...और वाकई इमरान की अगली रीलिज आवारापन में...जो कि भट्ट कैंप ने ही बनाई थी...इस फिल्म में नई नवेली हीरोइन श्रेया सरन तक को बख्श दिया...इसके बाद लगा कि कोर्ट की सख्ती कुछ असर ला रही है...लेकिन ये क्या...अगली ही फिल्म द ट्रेन में एक क्या दोनों हीरोइनों से भिड़ गए(रीड-होंठ चबा बैठे...असल में अब तक इमरान के किरदार जिस तरह के छिछोरे होते हैं-वो हीरोइन के होंट चाटते नहीं, चबाते हुए ज्यादा नेचुरल लगते है- बंधु मर्डर से लेकर इस फिल्म तक रिकार्ड उठाकर देख लीजिए, पता नहीं उनके किरदार से फिल्मकार सोसाइटी को क्या मैसेज देना चाहते हैं)

खैर, इमरान हाशमी के लिए ये कोई नई बात नहीं थी...नई बात तो थी...धर्मेन्द्र के लिए...धर्मेन्द्र के पचास साला फिल्मी करियर में स्मूचिंग का पहला मौका लगा...फिल्म थी...अनुराग बासू की लाइफ इन अ मेट्रो और धरम गरम के सामने थी- नफीसा अली. क्या चुम्मा चाटी हुई...जिसे याद करके ही- जहां तक मुझे याद है किसी पत्रकार बंधु ने हेमा जी से पूछ लिया- कैसा लगा धरम जी का सीन तो वो ठहाका लगा पड़ी...साफतौर पर उन्हें अपना ऑफ स्क्रीन सीन याद आ गया...मतलब हेमा जी को कोई आपत्ति नहीं.) वैसे, किस के मामले में साल 2007 वेटरन एक्ट्रैस शबाना आज़मी के लिए भी नया अनुभव लेकर आया. वो सीरियस फिल्मों में कुछ गर्म सीन पहले भी दे चुकी हैं...लेकिन इतने हल्के हनीमून ट्रेवेल्स प्राईवेट लिमिटेड मे कहानी की डिमांड कुछ इस तरह थी...कि शबाना को नॉन-हीरो एक्टर बोमन ईरानी के साथ पैशनेट सीन देना पड़ा... अनिल कपूर का तो नाम इस कैटिगरी में छूट ही रहा था...जिन्होंने सलामे इश्क में अपनी बिटिया सोनम की उम्र की हीरोइन-(चलिए नाम क्या बताना, आप भूल गए होंगे) को चाटते नजर आए...गनीमत थी बुजुर्गों के सीन पर बच्चे ध्यान नहीं दिया करते, ध्यान भी देते हैं, तो हंगामा नहीं करते(ये इंडिया की खूबी है) सो इन दोनों तीनों ही किस पर किचकिच बिलकुल भी नहीं हुई...

लेकिन बड़ों की इस हरकत का बच्चों का हौसला जरूर बढ़ा...खुद धर्मे्द्र के भतीजे अभय दयोल प्रोड्यूसर डाइरेक्टर्स पर किस के लिए प्रेशर बनाते नजर आए...(ये वाली खबर अंदर की है यार ज्यादा सीरियसली न लेना) बहुत प्रेशर बनाने के बाद उन्हे मिला एक मौका मनोरमा सिक्स फिट अंडर में...लेकिन बिटिया एषा दयोल ने तो हद ही कर दी. डार्लिंग में ऐषा अब तक मेंटेन की हुई अपनी लीमिट लांघ गई...फिल्म को देख कर लगा कि एषा और फरदीन के साथ पानी का कैरेक्टर जानबूझ कर गढा हुआ है...ताकि दर्शक सराबोर हो सकें.

वैसे इस साल उपेन पटेल जैसे हंक(देशी भाषा में सांड) ने भी हीरोइनों को किस करने में अपनी नई लीमिट बना डाली. पहले जहां वो प्रति फिल्म एक हीरोइन को अपने साथ काम करने का दंड देते थे, इस बार शाका लाका बूम बूम में दो हॉट हीरोइनों कंगना रानावत और सेलिना जेटली को बता दिया कि उनके साथ काम करने की कीमत क्या होती है. और तो और, आफताब शिवदसानी भी इस साल काफी रेड-रेड नजर आए...विक्रम भट्ट की फिल्म में आफताब ने सेलिना जेटली के साथ इंटिमेसी के ऐसे तेवर दिखाए...दर्शकों का चेहरा भी मारे शर्म के लाल हो गया- क्या यार, क्या ये फिल्म सेंसर बोर्ड ने सिर्फ यही दिखाने के पास की थी.(वैसे बोर्ड भी क्या करे, हर फिल्म में कुछ न कुछ ऐसा स्पेशल होता ही है...कहीं कुछ ज्यादा हो जाता है...तो अपनी बला से)

हां, सिचुएशनल किस की बात और है- जैसा कि आजा नचले में कुणाल कपूर और कोंकणा सेन ने किया...और जब वी मेट में शाहिद और करीना ने किया. इसमें बिलकुल वो रीयल लाइफ लिप-लॉक वाली वल्गरिटी नहीं थी...(आपको याद ही होगा वो रेस्टुरेंट वाला सीन जिसमें शाहिद और करीना दोनों ही एक दूसरे के मुंह में जीभ डाल कर लपलपा रहे थे.)

रीयल लाइफ की बात आते ही बॉलीवुड का सीन शिल्पा और बिपाशा के नाम से सेनसेशनल हो जाता है. मौका तो आपको याद ही होगा...दिल्ली में वो था एड्स का जागरुकता अभियान जिसके लिए हॉलीवुड के टॉप गियर ऐक्टर रिचर्ड गेर खास तौर पर आए थे...लेकिन किसी को क्या पता था कि रिचर्ड भरे मंच पर शिल्पा के साथ एक्सपेरिमेंट कर ये बता देंगे कि इस लीमिट तक जाने से एड्स नहीं होता...रिचर्ड को ये नहीं पता कि हमारे कल्चर में पराई औरत के इतने पास जाने का मतलब क्या होता...और वो तो अपनी रौ में शिल्पा के इतने पास चले गए, मानो लौटने का कोई रास्ता ही न बचा हो...देर तक झुकी हुई शिल्पा को बांहों में थामे रखा...इस चुंबन से देश में मानो आग ल गई...अलग अलग अदालतों में अश्लीलता की नई अर्जियां दाखिल की गई...लेकिन शिल्पा महान निकली...शिल्पा ने गियर को न रत्ती भर दोष दिया...न शब्द भर कोसा.शिल्पा क्या, बिपाशा उनसे कम थोड़े ही हैं...याद कीजिए जरा रोनाल्डो वाला सीन, और सोचिए, आपको नहीं लगता कि किस के मामले में बॉलीवुड का फंडा साफ हो चला है, जब ऑन स्क्रीन चल सकता है तो ऑफ स्क्रीन में क्या हर्ज है. अपनी बिल्लो रानी हैं- गई तो थीं सेवेन वंडर्स की एनाउंसमेंट सेरेमनी मे...लेकिन सॉकर स्टार रोनाल्डो के साथ खतरनाक पोज में पकड़ी गई. और देखिए देशवासियों को क्या फंडू बहाना मारा- हम किस कहां कर रहे थे- डांस फ्लोर पर नाच रहे थे कि अचानक रोनी को मेरे कान में कुछ कहने की जरूरत आन पड़ी सो कह दिया...हम तो हंस कर रह गए, शायद यही वजह है इस सीन पर लोगों ने शिल्पा जितना हंगामा नहीं किया, अरे भई, जब जॉन को कोई फर्क नहीं पड़ता, तो इसमें जनता जनार्दन का क्या जाता है.
क्या बंधु, हमारा क्या जाता है।